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दिल्ली सल्तनत

भारतीय इतिहास को तीन भागो में बाटा गया है
  • प्राचीन भारत
  • मध्यकालिन भारत
  • आधुनिक भारत
मध्यकालिन भारत – 712 ईसवी से 1887 के बीच का समय अन्तराल मध्यकालिन भारत के अंतर्गत आता है इसमें प्रमुख रूप से तीन घटनाए आती है
दिल्ली सल्तनत
मुगलकाल
यूरोपिय कम्पनी

दिल्ली सल्तनत

मघ्य काल में सबसे पहले मुहम्मद बिन काशिम भारत को लुटने की दृष्टि से अरब प्रान्त में प्रवेश किया | इसके बाद महमूद गजनबी और मुहम्मद गौरी ने भी भारत को लुटने का प्रयास किया | जब मुहम्मद गौरी ने लगभग उत्तर भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया तब उसने यह शासन अपने गुलाम कुतुबुद्दिन ऐबक को सोंप दिया और इसी कुतुबुद्दिन ऐबक ने भारत देश में दिल्ली सल्तनत की स्थापना की |
दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत 5 राजवंश आते हैं
गुलामवंश (1206-1290)
खिलजी वंश (1290 -1320)
तुगलक वंश (1320 – 1414)
सय्द वंश (1414-1451)
लोदी वंश (1451-1526)

गुलाम वंश (इल्बरी वंश) (1206-1290)

इस वंश का संस्थापक कुतुबुद्दिन ऐबक था | इसने लाहौर को अपनी राजधानी बनाया था | भारत देश में राजस्व प्रथा को मध्यकल में इसी ने प्रारम्भ किया था और दिल्ली की कुतुममिनार की नींव कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही रखी थी | इसका निर्माण कार्य इल्तुतमिश ने पूरा किया था | इसी इल्तुतमिश ने अपने शासन कल में “तुर्क-ए-पहलगामी ” और “इक्ता” प्रणाली को शुरू किया था | इन दोनों प्रणालीयो का विनाश बलबन ने किया था | बलबन पुरे गुलाम वंश का एक प्रतापी शासक था | इसने कई हिन्दुओं को उच्चपदों पर आसीन किया था | पुरे गुलाम वंश की पहली मुस्लिम शासिका “रजिया सुल्तान ” थी | इसने अपने शासन काल में “कैरा” प्रणाली को अपनाया था | जिस कारण रजिया सुल्तान का व्यापक पैमाने पर विरोध किया गया | इस वंश का आखरी शासक “शम्मुद्दीन कैंमर्स ” था |

खिलजी वंश (1290 -1320)

इस वंश का संस्थपाक जलाउद्दीन फ़िरोज़ खिलजी था | इसके सेनापति अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सुल्तान की हत्या की और खिलजी वंश का शासक बन गया था | अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासन काल में ” जमेयत खाना मज्जिद “, “सीरी का किला “, “हजार खम्भा महल ” इत्यादि इमारतों का निर्माण कर वाया था | इसने भारत देश के गुप्तचर प्रणाली को अपनाया था| बाजार में घूमने वाले गुप्तचरो को “बरिद ” कहा जाता था जबकि सामान्य गुप्तचरों को “मुनिहान’’ कहा जाता था | अल्लाउद्दीन खिलजी ने अपने शासन काल में “मूल्य नियंत्रण प्रणाली” अपनाया था और इससे पुरे दिल्ली सल्तनत में सब से ज्यादा टेक्स वसूला था | इसके सेनापति का नाम मलिक काफूर था | अल्लाउद्दीन खिलजी के बाद मुबारक खिलजी और खुसरो खां अंतिम शासक हुए |

तुगलक वंश(1320 – 1414)

इस वंश का संस्थापक गयाउसुद्दिन तुगलक था मध्यकाल में इसने सबसे पहले चाँदी के सिक्के चलवाये थे | इसके सेनापति का नाम जुना खां था | यही जुना खां आगे चलकर मुहुम्मदबिन तुगलक के नाम से जाने जाना लगा | मुहुम्मदबिन तुगलक के शासन काल में अफ्रीकी यात्री इबनबतुता भारत आया था | इसने “रेहला” नामक पुस्तक लिखी है और इसी पुस्तक में मुहुम्मदबिन तुगलक के शासन काल का वर्णन किया गया है | इसने अपने शासन काल में “अमीर-ए-कोही” नामक कृषि विभाग की स्थापना की थी | इस विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानो के लिए कल्याणकारी योजना बनाना था | इसने अपने शासन काल में चमड़े के सिक्के चलवाये थे और इतिहास में इसे पागल राजा की उपाधि दी गयी है |मुहुम्मदबिन तुगलक के बाद फ़िरोज़ तुगलक अगला शासक बना | फ़िरोज़ तुगलक ने अपने शासन काल में सभी प्रकार के कर (टेक्स) को बंद कर के केवल सिंचाई कर वसूला था और इसने अपने शासन काल में ” दीवान -ए-खैरात ” और दीवान-ए-बन्दगान ” की स्थापना की थी | फ़िरोज़ तुगलक के बाद महमूद शाह तुगलक ,तुगलक वंश का अगला (अंतिम ) शासक बना |

सय्द वंश (1414-1451)

इस वंश का संस्थपाक “ख्रिज खां” था और अंतिम शासक “अल्लाउद्दीन आलम शाह “था |

लोदी वंश(1451-1526)

इसके संस्थापक बहलोल लोदी था और इसने अपने राज्य में चाँदी के सिक्के चलवाये थे | इन्ही सिक्को को बहलोल सिक्के कहा जाता था | इसके बाद सिकंदर लोदी अगला शासक बना | आगरा शहर की स्थापना सिकंदर लोदी ने की थी | अल्लाउद्दीन खिलजी के बाद इसने सबसे ज्यादा कर वसूला था |
अंत में 21 अप्रेल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने लोदी वंश के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को पराजित करके भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना कर दी |

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