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भारत देश के पठार

भारत देश के पठार

जब जमीन के अंदर के मेग्मा 2000 मीटर के नीचे जमता हे | तब पठारो का निर्माण होता हे | पूरे भारत देश मे सबसे ज्यादा खनिज पठारो के माध्यम से प्राप्त किए जाते हे | ओर इनमे से सबसे महत्वपूर्ण छोटा नागपूर का पठार हे | जो की झारखंड मे स्थित हे | ओर इसके अतिरिक्त कई प्रकार के पठार भारत मे स्थित हे |
1] दक्कन का पठार – 5 लाख वर्ग किमी के क्षेत्रफल पर इस प्रकार का पठार फेला हुआ हे इस पठार का अधिकतम विस्तार महाराष्ट्र मे हे इस पठार का निर्माण काली मिट्टी से हुआ हे काली मिट्टी निर्माण – बेसाल्ट चट्टानों के टूटने से टूटने से होता है |
काली मिटटी का रंग – टिटेनिफेरस मेग्नेटाइट के कारण होता है |इस पठार से – क्रोमाइट लिग्नाइट ओर ग्रेफ़ाइट पर्याप्त मात्रा मे प्राप्त किए जाते हे |
2] छोटा नागपुर का पठार – 2 लाख 25 हज़ार वर्ग किमी के क्षेत्रफल पर इस प्रकार का पठार फेला हुआ हे ओर पूरे भारत देश मे सबसे ज्यादा खनिज इसी पठार से प्राप्त किए जाते हे जिस कारण यह पठार खनिज का भंडार कहलाता हे |
लोहा ,ताँबा ,युरेनियम इत्यादि इस पठार से पर्याप्त मात्रा मे प्राप्त किए जाते हे |
युरेनियम के लिए भारत की प्रसिद्ध खदान जादू-गोडा की खदान इसी पठार मे लगाई गयी हे ओर इस पठार का निर्माण जलोड़ मिट्टी से हुआ हे |
3] मेकाल का पठार – इस प्रकार का पठार मध्यप्रदेश ओर छत्तीसगढ़ की सीमा रेखा पर स्थित हे | झारखंड के बाद सबसे ज्यादा लोहा इसी पठार से प्राप्त किया जाता हे ओर लोहे के अलावा ताँबा ओर थोड़ी मात्रा मे ग्रेफ़ाइड़ भी प्राप्त किया जाता हे | इसका सर्वोत्त्म शिखर अमर-कंटक हे जिससे पश्चिम मे – नर्मदा ,उत्तर मे– सोन दक्षिण मे महानदी निकलती हे |
4] कोरोमंडल का पठार – 82 हज़ार वर्ग किमी के क्षेत्रफल पर इस प्रकार का पठार केरल से लेकर आंध्रप्रदेश की सीमा तक फेला हुआ हे ओर इसका निर्माण लेटराइट मिट्टी से हुआ हे यह मिट्टी सबसे ज्यादा तंबाकू की खेती के लिए महत्वपूर्ण होती हे, जिस कारण सबसे ज्यादा तंबाकू अंध्र्प्रादेश मे प्राप्त किया जाता हे ओर इस पठार से सोना ओर चाँदी पर्याप्त मात्रा मे प्राप्त किए जाते हे ओर यह मिट्टी चाय की खेती के लिए सर्वाधिक प्रयुक्त होती हे |

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