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Ancient History (प्राचीन भारत )

Ancient History (प्राचीन इतिहास)

Ancient History

सिंधु /हड़प्पा सभ्यता:

 Ancient History
सबसे पुरानी सभ्यता – सिंधु सभ्यता है |सिंधु सभ्यता के लोग – भारत के मूल निवासी ( द्रविण लोग ) थे |
-सिंधु सभ्यता का पता कैसे चला ?
1857 में कराची और लाहौर के बीच रेल पटरी बिछाने के दौरान जॉन ब्रंटन और विलियम ब्रंटन को दो प्राचीन नगरों हड़प्पा और मोहनजोदड़ो का पता लगा |
उत्खनन के फलस्वरूप बहुत सी जानकारिया प्राप्त हुई :
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  • तकरीबन 5000 साल पहले एक उच्च स्तरीय सभ्यता विकसित हुई थी ,जिसकी नगर नियोजन व्यवस्था बहुत उच्च कोटि की थी । लोगो को नालियों तथा सड़को के महत्व का अनुमान था ।
  • सिंधु सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी |
  • सिंधु सभ्यता के लोग ईटो का प्रयोग करते थे | गुजरात का शहर लोथल सिंधु सभ्यता का एक प्रमुख बंदरगाह था | मोहनजोदड़ो में सबसे बड़ा भवन – धान्यागार था और विशाल स्नानागार (ग्रेट बाथ ) मोहनजोदड़ो में है,
  • कांस्य से बनी नर्तकी की मूर्ति मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई | और उत्खनन के फलस्वरूप ये पता लगाया गया की सिंधु अर्थव्यवस्था की ताकत क्या थी – कृषि + पशुपालन |हड़प्पा सभ्यता से अभी तक लोहे की प्राप्ति नहीं हुई है |सिंधु सभ्यता के लोगो ने सबसे पहले कपास का उत्पादन किया
इसके बाद भारत में सबसे पहले ईरान देश के लोगो ने प्रवेश किया और इन्हे आर्यन्स कहा जाता था | इस आर्यन्स ने भारत के मूलनिवासी द्रविण लोगो को युद्ध में पराजित करके अपना शासन स्थापित किया था|

वैदिक सभ्यता

1 ] वैदिककाल का विभाजन दो भागो 1 .ऋग्वेदिककाल – 1500 – 1000 ई पूर्व और  2 . उत्तर वैदिककाल -1000 -600 ई पूर्व में किया गया हे |
2 ] आर्यो द्वारा निर्मित सभ्यता वैदिक सभ्यता कहलायी हे |
3 ] आर्यो द्वारा विकसित सभ्यता ग्रामीण सभ्यता थी |
4 ] आर्यो की भाषा संस्कृत थी |
5 ] अर्योका मुख्य पेय पदार्थ सोमरस था | यह वनस्पति से बनाया जाता था |
6 ] आर्यो के मनोरंजन के मुख्य साधन थे – संगीत ,रथदौड़ ,घुड़दौड़ एवं घुटक्रीडा |
6 ] आर्यो का मुख्य व्यवसाय पशुपालन एवं कृषि था |
7 ] आर्यो का प्रिय पशु घोडा एवं सर्वाधिक प्रिय देवता इन्द्र थे |
8 ] मनुष्य एवं देवता के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले देवता के रूप में अग्नि की पूजा की जाती थी |
आर्यो के उदय के बाद भारत को 16 राज्यों पर बाट दिया गया | और 16 राज्यों में सबसे शक्तिशाली मगधमहाजनपद था | और यहाँ पर सबसे पहले बिंबसार ने हरियक वंश की स्थापना की थी इस वंश के बाद महापद्मानद ने नन्द वंश की स्थापना कर दी , और इस वंश का आखरी शासक घनानंद था | और इसी घनानंद को अपने गुरु चाणक्य की सहायता से चन्द्रगुप्त मौर्य ने हरा कर मगध पर मौर्यवंश की स्थापना कर दी |

मौर्यवंश –

इस वंश का संस्थापक चंद्र गुप्तमौर्य था | इसके गुरु का नाम चाणक्य था चाणक्य का वास्त्विक नाम विष्णु गुप्त या कौटिल्य था | इसने अर्थशास्त्र नामक पुस्तक लिखी हे और इस पुस्तक में राजनैतिक सम्बन्ध का उल्लेख किया गया हे |

चन्द्रगुप्त मौर्य के शासंन काल में सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर ने हमला किया था और इस सेल्यूकस निकेटर के राजदूत का नाम मेगस्थनीज़ था | और मेगस्थनीज़ ने इंडिया नामक पुस्तक लिखी थी |
सिकंदर की पुत्री कार्नेलिया के साथ चंद्र गुप्त मौर्य का विवाह हुआ | इसने भारत के 8 महाजनपदों पर कब्ज़ा जमाया था | इसके बाद बिन्दुसार अगला शाशक बना | पुराणों में बिन्दुसार को भद्रसार या वारिसार के नाम से जाना जाता हे |यह जैन धर्म का अनुयायी था बिंदुसार ने भारत के 10 महाजनपदों पर कब्ज़ा जमाया था | इसके बाद अगला शासक अशोक हुआ ,अशोक एक महाप्रतापी शासक था इसके शाशन काल में शीलालेखो का प्रचलन बड़ा , इन शिलालेखों की खोज सबसे पहले 1750 ईस्वी में फेनथेलर ने की थी |और सबसे पहले 1837 ईस्वी में जेम्स प्रिसेप ने इन शिलालेखों को पड़ा था |प्रारम्भ में अशोक जैन धर्म का अनुयायी था लेकिन बाद में कलिंगयुद्ध में भारी मार काट के बाद इसने शास्त्रों का त्याग कर दिया था | और गौतम बुद्ध के शिष्य उपगुप्त से बोध धर्म की शिक्षा ली थी | अशोक के स्तम्भ लेख की संख्या 7 थी |और इस वंश का आखरी शाशक वृहद्रथ था|

गुप्तवंश –

सात वातन वंश के सातकर्णी को युद्ध में पराजित करके श्री गुप्त ने गुप्त वंश की स्थापना की थी |श्री गुप्त ने भारत के 6 महाजनपदों को जीता था इसके बाद घटोत्कच और फिर चन्द्रगुप्त प्रथम अगले शासक बने |

चन्द्रगुप्त प्रथम ने राजकुमारी लिच्छवी कुमार देवी के साथ विवाह किया था |इसने भारत में गुप्त संवत की शुरुवात की थी |चंद्र गुप्त प्रथम के बाद समुद्र गुप्त अगला शासक बना | यह एक संगीत प्रेमी था और इसने अपने सिक्के पर विणा बजती हुई देवी की मूर्ति अंकित की थी |महापराक्रमी होने के कारन इसे भारत देश का नेपोलियन कहा जाता था | इसके बाद चन्द्रगुप्त मौर्य द्वितीय अगला शाशक बना |
पुरे गुप्त वंश में सबसे महाप्रतापी चंद्रगुप्तमौर्य द्वितीय था | इसने भारत देश में ‘शको’ के आक्रमणों को विफल किया था | जिस कारन इसे शकोप्रमी कहा गया , भारत के इतिहास में सबसे पहली बार इसी ने चांदी के सिक्के चलवाये थे |कालिदास ,आर्यभट्ट ,वराहमिहिर ,भ्रमगुप्त ,श्रूषुत इत्यादि विद्वान् इसी के शासन काल में थे |
कालिदास ने मेघदूतम ,कुमार संभव की रचना की थी | और आर्य भट्ट ने सूर्य सिद्धांत की रचना की थी |कुल मिलकर संस्कृति उपलब्धियों के कारन चन्द्रगुप्त द्वितीय का शासन काल भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल कहलाता हे इसके बाद कुमार गुप्त अगला शाशक बना नालंदा यूनिवर्सिटी की स्थापना कुमार गुप्त ने की थी |इसके बाद स्कंध गुप्त अगला शाशक बना इसने भारत में सबसे ज्यादा कृतिम झीलों का निर्माण कराया था इस वंश का आखरी शासक भानु गुप्त था |
| महत्वपूर्ण points |Ancient History |
1 ] भारत में सबसे प्राचीनतम वेद ऋगवेद हे और गायत्री मन्त्र की रचना ऋगवेद से ही की गयी हे |इसे संस्कृत भाषा का जनक माना जाता हे|
2 सबसे आधुनिकतम वेद अर्थर्ववेद हे और जादू टोना , टोटका अर्थर्ववेद से ही लिया गया हे |
3 ] भारतीय संगीत का जनक साम्य वेद को माना जाता हे |और यजुर्वेद में श्री कृष्ण की उपासना का उल्लेख मिलता हे|
4 ] राजतरंगिणी पुस्तक के लेखक कल्हण हे और यह पुस्तक कश्मीर के इतिहास से सम्बंधित हे | जबकि इंडिका पुस्तक मेगस्थनीज के द्वारा लिखी गयी हे |और यह चंद्रगुप्तमौर्य के शासन काल में भारत आया था |
5 ] चीनी यात्री ह्वेनसांग हर्षवर्धन के शासन काल में जबकि चीनी यात्री फाहियान चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में आया था |
6 ] भारत का आईन्स्टीन – नागार्जुन
भारत का नेपोलियन – समुद्रगुप्त
LIGHT OF ASIA – गौतमबुद्ध
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